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आ गई दुनिया की पहली सरकारी क्रिप्टो करेंसी पेट्रो, जानिए कहां से हुई शुरुआत ,

वेनेजुएला ने गहराते आर्थिक संकट से बाहर आने की कोशिशों के बीच गैरपारंपरिक कदम उठाते हुए तेल आधारित क्रिप्टोकरेंसी ‘पेट्रो की शुरुआत की है। यह सरकारी मान्यता प्राप्त विश्व की पहली क्रिप्टोकरंसी है।

20 घंटे में पेट्रो को 73.5 करोड़ डॉलर के मिले खरीदार
वेनेजुएला की वामपंथी सरकार ने शुरुआती बिक्री के लिए पेट्रो की 3.84 करोड़ इकाइयां पेश की हैं। इसकी बिक्री 19 मार्च तक चलेगी। प्रधानमंत्री निकोलस मदुरो के अनुसार बिक्री के शुरुआती 20 घंटे में पेट्रो को 73.5 करोड़ डॉलर की पेशकश मिली हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रो हमारी स्वतंत्रता एवं आर्थिक स्वायत्तता को मजबूत करता है। यह हमें उन विदेशी ताकतों के लालच से बचने में मदद करेगा जो हमारा तेल बाजार जब्त कर हमें घुटन में रखने की कोशिश कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि वेनेजुएला के पास विश्व का सबसे विशाल तेल भंडार है। हालांकि, देश भीषण आर्थिक एवं राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है।

क्या है क्रिप्टो करेंसी
यह आभाषी मुद्रा है। इसकी खरीद-बिक्री इंटरनेट के जरिये आईडी-पासवर्ड के जरिये की जाती है। इसे किसी भी करेंसी में नहीं बदला जा सकता है। आईडी-पासवर्ड भूल जाने या हैक होने पर पूंजी डूबने का भी खतरा है। बिक्वाइन भी एक क्रिप्टो करेंसी है जो दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चित है।

एसबीआई ने क्रिप्टो करेंसी पर चेताया
देश के सबसे बड़ी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की सहायक इकाई एसबीआई कार्ड ने बिटक्वाइन जैसी आभासी मुद्राओं से जुड़े जोखिमों के प्रति उपभोक्ताओं को मंगलवार को सतर्क किया। दरअसल क्रिप्टो करेंसी की खरीदारी नेट बैंकिंग के जरिये या डेबिट-क्रेडिट कार्ड के जरिये की जाती है। इसे देखते हुए एसबीआई कार्ड ने यह चेतावनी जारी की है।

रिजर्व बैंक दे चुका है चेतावनी
bitcoin और अन्य क्रिप्टो करेंसी को लेकर रिजर्व बैंक वर्ष 2013 से ही निवेशकों को अगाह करता रहा है। आरबीआई यह कह चुका है कि देश में इसको मान्यता नहीं है और ऐसे में इसमें कमाई डूबने पर निवेशक खुद जिम्मेदार होंगे। दिसंबर में देश में आयकर विभाग ने कई bitcoin एक्सचेंजो पर छापा भी मारा था। दरअसल क्रिप्टो करेंसी को दुनिया के किसी भी देश में मान्यता नहीं है। वेनेजुएला पहला ऐसा देश है जिसने सरकारी तौर पर क्रिप्टो करेंसी जारी है। इजरायल भी कुछ माह पहले bitcoin को लेकर चेतावनी जारी कर चुका है।

भारत में खरीदने पर सात साल तक जेल
केंद्र सरकार आभासी मुद्रा के खिलाफ धनशोधन कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी कर रही है, जिसमें तीन से सात साल तक जेल का प्रावधान होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आम बजट में आभासी मुद्राओं को गैरकानूनी बताए जाने के बाद वित्त मंत्रलय ने यह सक्रियता दिखाई है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक इदीरियम, रिपल, बिटक्वाइन जैसी आभासी मुद्रा को लेकर पहले यह स्पष्ट नहीं था कि किस कानून के तहत कार्रवाई हो। लेकिन इसे गैरकानूनी घोषित करने के साथ सरकार ने इसे धनशोधन कानून के दायरे में लाने की सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

सख्ती से दाम धड़ाम
बिटक्वाइन की कीमत पिछले साल 20 हजार डॉलर के करीब चली गई थी। लेकिन भारत में वित्त मंत्री द्वारा बजट में इसपर सख्ती के उपायों की घोषणा से इसके दाम सात हजार डॉलर तक आ गए थे। पिछले साल आयकर विभाग और ईडी की टीम ने कई बिटक्वाइन एक्सचेंज पर छापा भी मारा था। आयकर विभाग संदिग्ध निवेशकों से यह पूछताछ भी करा रहा है कि इसमें निवेश के लिए पैसे कहां से आए।

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